Wednesday, July 27, 2022

पुस्तक मेला( Book Fair) 2022








    

         केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा 25 जुलाई 2022 को पुस्तक मेला का आयोजन किया गया जिसमें विद्यार्थी एवं विद्यालय परिवार के सभी लोगों को अपने-अपने रूचि के अनुरूप पुस्तकों का चयन कर खरीदारी करने का अवसर प्राप्त हुआ | 

पुस्तक मेला के सफल आयोजन पर पुसतकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा विद्यार्थी,अभिभावक एवं विद्यालय परिवार के सभी लोगों के प्रति धयन्वाद ज्ञापित करता हैं साथ ही आशा करता हैं कि 2023 में पुस्तक मेला के आयोजन पर सभी का भरपूर सहयोग प्राप्त होगा |

         पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय  रिफाइनरी नगर मथुरा 





Friday, July 22, 2022

राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण दिवस(22जुलाई)

  


आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा राष्ट्रीय झण्डा अंगीकरण 'दिवस(22जुलाई) मना हा हैं l 
    इतिहास में आज का दिन हर भारतीय के लिए काफी महत्वपूर्ण हैं। रंग, रूप वेष, भूषा से चाहे हम कितने भी अनेक हो, लेकिन तिरंगे के नीचे जब खड़े होते हैं तो हम एक हैं, भारतीय हैं। आज उसी भारत के गौरव, तिरंगे का अंगीकरण दिवस है। 22 जुलाई 1947 में भारतीय संविधान सभा की बैठक में तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया गया था, जो 15 अगस्‍त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्‍वतंत्रता के कुछ ही दिन पहले हुई थी।
राष्ट्रीय ध्‍वज का इतिहास

राष्‍ट्रीय ध्‍वज शुरुआत में कई परिवर्तनों से हो कर गुजरा। स्‍वतंत्रता के राष्‍ट्रीय संग्राम के दौरान कई अलग-अलग ध्वजों का प्रयोग किया गया। भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज का विकास आज के इस रूप में पहुंचने के लिए अनेक दौर से गुजरा। प्रथम राष्‍ट्रीय ध्‍वज 7 अगस्‍त 1906 को पारसी बागान चौक (ग्रीन पार्क) कलकत्ता ( कोलकाताव ) में फहराया गया था । इस ध्‍वज को लाल, पीले और हरे रंग की क्षैतिज पट्टियों से बनाया गया था। पीली पट्टी पर कमल बना हुआ था

दूसरे ध्‍वज को पेरिस में मैडम कामा और 1907 में उनके साथ निर्वासित किए गए कुछ क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था (कुछ के अनुसार 1905 में)। यह भी पहले ध्‍वज के समान था, लेकिन इसके सबसे ऊपरी की पट्टी पर सात तारे सप्‍तऋषि को दर्शाते हैं। यह ध्‍वज बर्लिन में हुए समाजवादी सम्‍मेलन में भी प्रदर्शित किया गया था।

तीसरा ध्‍वज 1917 में आया जब हमारे राजनैतिक संघर्ष ने एक निश्चित मोड लिया। डॉ. एनी बीसेंट और लोकमान्‍य तिलक ने घरेलू शासन आंदोलन के दौरान इसे फहराया।

कांग्रेस के सत्र बेजवाड़ा (वर्तमान विजयवाड़ा) में किया गया, जहां आंध्र प्रदेश के एक युवक पिंगली वेंकैया ने एक झंडा बनाया। यह दो रंगों लाल और हरा रंग जो दो प्रमुख समुदायों अर्थात हिन्दू और मुस्लिम का प्रतिनिधित्व करता है। गांधी जी ने सुझाव दिया कि भारत के शेष समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए इसमें एक सफेद पट्टी और राष्ट्र की प्रगति का संकेत देने के लिए एक चलता हुआ चरखा होना चाहिए।

1931 ध्‍वज के इतिहास में एक यादगार वर्ष रहा। तिरंगे ध्‍वज को राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाने के लिए एक प्रस्‍ताव पारित किया गया । यह ध्‍वज जो वर्तमान स्‍वरूप का पूर्वज है, केसरिया, सफेद और मध्‍य में चलते हुए चरखे के साथ था।यह स्‍पष्‍ट रूप से बताया गया इसका कोई साम्‍प्रदायिक महत्‍व नहीं था और इसकी व्‍याख्‍या इस प्रकार की जानी थी। 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे मुक्‍त भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज के रूप में अपनाया। स्स्वतंत्रता मिलने के बाद इसके रंग और उनका महत्‍व बना रहा। केवल ध्‍वज में चलते हुए चरखे के स्‍थान पर सम्राट अशोक के धर्म चक्र को दिखाया गया।

वर्तमान में भारत के राष्‍ट्रीय ध्‍वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्‍य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी हरियाली, उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है।

ध्‍वज संहिता

2002 से पहले, भारत की आम जनता के लोग केवल गिने चुने राष्ट्रीय त्योहारों को छोड़ सार्वजनिक रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहरा नहीं सकते थे। लेकिन एक याचिका पर 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्‍वज संहिता में संशोधन किया गया और स्‍वतंत्रता के कई वर्ष बाद भारत के नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और फैक्‍ट‍री में न केवल राष्‍ट्रीय दिवसों पर, बल्कि किसी भी दिन बिना किसी रुकावट के फहराने की अनुमति मिल गई।

भारतीय नागरिक राष्‍ट्रीय झंडे को शान से कहीं भी और किसी भी समय फहरा सकते है, बशर्ते कि वे ध्‍वज की संहिता का पालन करें और तिरंगे की शान में कोई कमी न आने दें। सुविधा की दृष्टि से भारतीय ध्‍वज संहिता, 2002 को तीन भागों में बांटा गया है। संहिता के पहले भाग में राष्‍ट्रीय ध्‍वज का सामान्‍य विवरण है। संहिता के दूसरे भाग में जनता, निजी संगठनों, शैक्षिक संस्‍थानों आदि के सदस्‍यों द्वारा राष्‍ट्रीय ध्‍वज के प्रदर्शन के विषय में बताया गया है। संहिता का तीसरा भाग केन्‍द्रीय और राज्‍य सरकारों तथा उनके संगठनों और अभिकरणों द्वारा राष्‍ट्रीय ध्‍वज के प्रदर्शन के विषय में जानकारी देता है।

पुस्तकालय केoविo,रिफाइनरी नगर,मथुरा

Thursday, July 14, 2022

Best Open Access Resources

Following is the list of some best ICT initiatives (India and abroad) with their access link:


1. National Digital Library-👉https://ndl.iitkgp.ac.in/


2. SWAYAM Online Courses👇

 https://storage.googleapis.com/uniquecourses/online.html


3. National Knowledge Network 👉https://nkn.gov.in/


4. NPTEL👉 https://finptel.ac.in


5. InfoPort👉 https://infoport.inflibnet.ac.in/


6. Talks to Teacher👇

 https://www.ted.com/playlists/182/talks_from_inspiring_teachers


7. A-VIEW👉 http://aview.in/


8. Virtual Labs👉 https://www.vlab.co.in/


9. FOSSEE👉 https://fossee.in/


10. Spoken Tutorial 👉https://spoken-tutorial.org/


11. e-Yantra👉 https://www.e-yantra.org/


12. Oscar++👉 https:////www.it.iitb.ac.in/oscar/


13. E-Kalpa👉 https://icar.org.in/content/e-kalpa


14. NCERT Text Books👉 http://ncert.nic.in/textbook/textbook.htm


15. Directory of Open Access Books👉 https://www.doabooks.org/


16. Directory of Open Access Journals👉 https://doaj.org/


17. Open Knowledge Repository — World Bank👇 

https://openknowledge.worldbank.org/


18. UG/PG MOOCs👇 

http://ugcmoocs.inflibnet.ac.in/ugcmoocs/moocs_courses.php


19. e-PG Pathshala 👉https://epgp.inflibnet.ac.in/


20. e-Content courseware in UG subjects👉 http://cec.nic.in/cec/


21. SWAYAMPRABHA 👉https://www.swayamprabha.gov.in


22. e-Shodh Sindhu👉 https://ess.inflibnet.ac.in/


23. Vidwan👉 https://vidwan.inflibnet.ac.in/


24. SNLTR👉 https://www.nltr.org/


25. Oxford Open 👇https://academic.oup.com/journals/pages/open_access


26. Cambridge University Press👉 https://www.cambridge.org/core/what-we-publish/open-access


27.Science Direct Open Access Content 👇https://www.sciencedirect.com/book/9781843342038/open-access


28. ILOSTAT 👉https://ilostat.ilo.org/


29. Project Euclid👉 https://projecteuclid.org/librarians/lib_oa


30. AidData 👉https://www.aiddata.org/


31. Springer Open Journals👉 https://www.springeropen.com/journals


32. Taylor & Francis Open Access 👇https://www.tandfonline.com/openaccess


33. Open Access Thesis & Dissertations👉 https://oatd.org/


34. Legal Information-commonlii 👉http://www.commonlii.org/in/


35. The OAPEN Foundation👉 http://www.oapen.org/home


36. PubMed Central PMC👉 https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/


37. Project Gutenberg👉 https://dev.gutenberg.org/


38. High Wire👉 https://www.highwirepress.com/


39. AGRIS👉 http://agris.fao.org/agris-search/index.do


40. Southern Connecticut StateUniversity👇

 https://libguides.southernct.edu/openaccess


41. LibriVox — Audio Books 👉https://librivox.org/


42. Wiley Open Access👉https://authorservices.wiley.com/open-research/open-access/browse-journals.html


43. Training and Courses by Tata Steel 👇http://www.capabilitydevelopment.org


44. Directory of Open Access Journals (DOAJ) 👉https://doaj.org/


45. Shodhganga-a reservoir of Indian theses👇 

https://shodhganga.inflibnet.ac.in/


46. Legal Information Institute of India👉 http://liiofindia.org/

LIBRARY KV MRN MATHURA

Sunday, June 5, 2022

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ 5 जून 2022


'विश्व पर्यावरण दिवस' को हर साल नए थीम के साथ मनाया जाता है. इस बार इसकी थीम है, 'ओन्ली वन अर्थ' (फोटो-canva.com)

'विश्व पर्यावरण दिवस' को हर साल नए थीम के साथ मनाया जाता है. इस बार इसकी थीम है, 'ओन्ली वन अर्थ'

आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मना हा हैं l 

हर साल आज यानी 5 जून को ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. आज के औद्योगीकरण के दौर में पर्यावरण के बारे में सोचना बेहद ज़रूरी है, क्योकि पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की वजह से पर्यावरण को पिछले कुछ दशकों में काफी नुकसान हुआ है. इसकी वजह से अब दुनियाभर के इकोसिस्‍टम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं. पर्यावरण को सुरक्षा प्रदान करने का संकल्प लेने के उद्देश्य से ही हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. ये समुद्री प्रदूषण, ओवरपॉपुलेशन, ग्लोबल वॉर्मिंग, सस्टनेबल कंजम्पशन और वाइल्ड लाइफ क्राइम जैसे पर्यावरणीय मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मंच रहा है, जिसमें 143 से अधिक देशों की भागीदारी रहती है.

विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व

‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में लोगों के बीच पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, ग्रीन हाउस के प्रभाव, ग्लोबल वार्मिंग, ब्लैक होल इफेक्ट आदि ज्वलंत मुद्दों और इनसे होने वाली विभिन्न समस्याओं के प्रति सामान्‍य लोगों को जागरूक करना है और पर्यावरण की रक्षा के लिए उन्‍हें हर संभव प्रेरित करना है.

विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास

विश्व पर्यावरण दिवस की स्थापना 1972 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा ह्यूमन एनवायरनमेंट पर स्टॉकहोम सम्मेलन (5-16 जून 1972) में की गई थी, जिसमें 119 देशों में हिस्सा लिया था. सभी ने एक धरती के सिद्धांत को मान्‍यता देते हुए हस्‍ताक्षर किए. इसके बाद 5 जून को सभी देशों में ‘विश्‍व पर्यावरण दिवस’ मनाया जाने लगा. भारत में 19 नवंबर 1986 से पर्यावरण संरक्षण अधिनियम लागू हुआ. 

पुस्तकालय केoविo,रिफाइनरी नगर,मथुरा


Friday, June 3, 2022

World bicycle day 2022

 

आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा ‬‘विश्व साइकिल दिवस’मना रहा हैं l

हर साल 3 जून को दुनियाभर में विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। विश्व साइकिल दिवस मनाने के पीछे कई उद्देश्य और फायदे हैं। साइकिल हमारे पर्यावरण के लिए फायदेमंद हैं तो वहीं साइकिल चलाना सेहत के लिए भी लाभकारी है। ऐसे में साइकिल का हमारे जीवन में अहम स्थान है। अगर एक वाहन के तौर पर देखें तो भारतीय परिपेक्ष्य में कई लोग स्कूल, कॉलेज, से लेकर कार्यस्थल तक जाने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करते हैं। यह पर्यावरण के लिए बहुत अच्छा साधन है। डीजल-पेट्रोल का दोहन कम होने के साथ ही शहर का प्रदूषण स्तर भी कम होता है। वहीं स्वस्थ रखने के लिए भी साइकिल का उपयोग किया जाता है। साइकिल चलाने से वजन कम करने से लेकर मांसपेशियों को मजबूती, अच्छा व्यायाम आदि हो जाता है। इसी तरह के कई फायदों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है।

साल 2018 से शुरू हुआ था विश्व साइकिल दिवस मनाना

आधिकारिक तौर पर पहली बार विश्व साइकिल दिवस 3 जून, 2018 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के द्वारा मनाया गया था. इस उद्घाटन समारोह में संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों, राजनयिकों, एथलीटों, साइकिलिंग समुदाय के अधिवक्ताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया था. इस अवसर पर साइकिल चलाने वाले लोगों की सेवा करने के कई तरीकों को भी साझा किया गया था.

विश्व साइकिल दिवस के आयोजन के पीछे यातायात के लिए एक आसान, सस्ती, भरोसेमंद और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद करने वाले साधन के तौर पर साइकलिंग को बढ़ावा देने का मकसद है. साथ ही साथ हेल्थ एक्सपर्ट्स साइकलिंग को एक परफेक्ट एक्सरसाइज़ मानते हैं 

साइकिल चलाने के फायदे (BENEFITS OF CYCLING):

हेल्दी हार्ट

साइकिलिंग (Cycling) को एक अच्छा एरोबिक एक्सरसाइज (Aerobic Exercise) बताते हैं एक्सपर्ट्स. इसीलिए, जब आप साइकिल चलाते हैं तो, इससे आपके दिल को बहुत फायदा होता है. इस तरह आपका हार्ट ज़्यादा हेल्दी बनता है और आपके लिए कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का ख़तरा भी कम होता है.

जॉइंट पेन से मिलती है राहत

एक बड़ा फायदा यह भी है साइकिल चलाने का कि इससे जॉइंट पेन (Joint Pain) कम होता है. दरअसल, साइकिल चलाते हुए पूरे पैर की एक्सरसाइज़ होती है. साइकलिंग में पैरों के मसल्स की अच्छी तरह से एक्सरसाइज़ हो जाती है और इसीलिए घुटनों और पैरों में होने वाले दर्द से राहत मिलती है.

ठीक होता है इम्यून सिस्टम

साइकिल चलाने से इम्यून सिस्टम ठीक तरीके से काम करता है. एक रिपोर्ट के अनुसार प्रतिदिन आधा घंटा साइकिल चलाने से इम्यून सेल्स एक्टिव हो जाते हैं और बीमार होने का खतरा कम हो जाता है.

बर्न होती हैं कैलोरीज

साइकिलिंग करना एक्स्ट्रा कैलोरी को बर्न करने में मदद करता है. साइकिलिंग करके एक्स्ट्रा कैलोरी को बहुत ही आसानी से बर्न किया जा सकता है.

साइकिल सम्पूर्ण विश्व में परिवहन का एक ऐसा साधन है जो समाज के आख़िरी व्यक्ति तक अपनी पहुँच रखता है. ये मानवीय विकास एवं प्रगति के इतिहास में पर्यावरण के साथ सौहार्द बनाए रखते हुए आगे बढ़ते रहने का दर्शन भी है. 

पुस्तकालय, के o वि o,रिफाइनरी नगर,मथुरा

LIBRARY ACTIVITIES

कक्षा 12वीं का विदाई समारोह(सत्र 2025-2026)

      पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती में  दिनाँक 07/02/2026 (शनिवार) को विदाई समारोह का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। ...