Monday, September 18, 2023

गणेश चतुर्थी का आयोजन


 केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में आज दिनांक 18 सितम्बर 2023 को गणेश चतुर्थी के कार्यक्रम का आयोजन बड़े ही उत्साह के साथ किया गया । कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों ने भगवान श्री गणेश जी से संबंधित भजन नृत्य एवं गायन किया।
1983 में लोकमान्य तिलक (सामाजिक कार्यकर्ता, भारतीय राष्ट्र वादी तथा स्वतंत्रता सेनानी) के द्वारा इस उत्सव की शुरुआत हुई। उस समय अंग्रेजी शासन से भारतीयों को बचाने के लिये एक गणेश पूजा की प्रथा बनायी।
गणेश चतुर्थी महाराष्ट्र का बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। यह हिन्दू धर्म का एक बहुत प्रिय पर्व है। ये उत्सव पूरे भारत में बेहद भक्ति भाव और खुशी से मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी का त्योहार आने के कई दिन पहले से ही बाजारों में इसकी रौनक दिखने लगती है। यह पर्व हिन्दू धर्म का अत्यधिक मुख्य तथा बहुत प्रसिद्ध पर्व है। इसे हर साल अगस्त या सितंबर के महीने में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह भगवान गणेश के जन्म दिवस के रुप में मनाया जाता है जो माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र है। ये बुद्धि और समृद्धि के भगवान है इसलिए इन दोनों को पाने के लिए लोग इनकी पूजा करते है।
इस दिन सभी भक्त अपने घरों, दफ्तरों या शैक्षिक संस्थानों में गणेश जी की मूर्ति को सजाते हैं। उस दिन वहां गणेश आरती और मन्त्रों के उच्चारण के साथ उनकी पूजा की जाती है। लोग भगवान गणेश से सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं और साथ ही ज्ञान माँगते हैं। पूजा के बाद सभी लोगों को प्रसाद दिया जाता है।



 पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा 

Friday, September 8, 2023

जन्माष्टमी का आयोजन

केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा मेंआज दिनांक 08 सितम्बर 2023 को  जन्माष्टमी के कार्यक्रम का आयोजन  बड़े ही उत्साह के साथ किया गया । कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों ने भगवान श्री कृष्ण के बाल लीलाओं पर आधारित नृत्य एवं गायन किया।

जन्माष्टमी का त्योहार जो पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है जिसे श्री कृष्ण का जन्मदिन कहा जाता है यह हिंदुओं का सुप्रसिद्ध त्यौहार है जो रक्षाबंधन के बाद भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाते हैं।

भगवान श्री कृष्ण वासुदेव और देवकी के आठवें पुत्र थे जिनका जन्म रोहिणी नक्षत्र में अष्टमी तिथि को हुआ था इस दिन चंद्रमा वृष राशि और सूर्य सिंह राशि में प्रवेश हुए थे इसलिए इसी काल में श्री कृष्ण के जन्म की खुशी मनाई जाती है और इस दिन श्री कृष्ण को मुख्य रूप से माखन मिश्री का भोग लगाते हैं।

श्री कृष्ण के जन्म से जुड़ी कथा

श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का सबसे शक्तिशाली मानव अवतार कहा जाता है जिनका जन्म पृथ्वी से राक्षसों की बुराई खत्म करने के लिए हुआ था कहा जाता है 5200 साल पहले श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था।

श्री कृष्ण का जन्म कंस नामक राजा के संरक्षण में जेल में हुआ था उनके जन्म के माता-पिता तो देवकी और वासुदेव थे परन्तु पालन-पोषण उनका नंद और यशोदा ने किया था। वासुदेव ने श्री कृष्ण का जन्म होते ही उन्हें नंद को सौंप दिया ताकि वह अपने पुत्र को कंस नामक राक्षस से बचा सके इसीलिए कृष्ण गोकुल में ही पले बढ़े और बड़े होकर श्री कृष्ण ने कंस का वध किया और इस संसार को उसके जुल्म से बचाया।

श्री कृष्ण के जन्मदिन के लिए लोग पूरा दिन उपवास रखते हैं और श्री कृष्ण के लिए विभिन्न प्रकार के भोग तैयार किए जाते हैं। जन्माष्टमी के दिन कान्हा जी की मूर्ति को दूध, घी, शहद, गंगाजल तथा तुलसी के पत्तों से बने पंचामृत से स्नान कराया जाता है।

भगवान कृष्ण के जन्म से भारतीय संस्कृति का गहरा जुड़ाव है औऱ भगवान कृष्ण ने भगवत गीता में मानव जीवन को सफल बनाने के बहुत से उपदेश दिए हैं। अतः जन्माष्टमी नामक त्योहार लोगों को बहुत भाता है जिसे बड़े ,बूढ़े और आजकल तो बच्चे भी बहुत उत्साह के साथ मनाते है।

पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा 


Tuesday, September 5, 2023

शिक्षक दिवस समारोह 5 सितम्बर 2023



केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में दिनांक 05 सितम्बर 2023 को शिक्षक दिवस समारोह आयोजित किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित करके प्राचार्य श्री संजय कुमार शर्मा के द्वारा किया गया।
शिक्षक दिवस के अवसर कार्यकारी निदेशक(आईओसीएल मथुरा)/विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष श्री अजय कुमार तिवारी जी ने वरिष्ठतम शिक्षकों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। मंच का संचालन श्री भारत भूषण द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम के अंत में श्रीमती पूजा शर्मा ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।

जीवन में सफल होने के लिए शिक्षा सबसे ज्यादा जरुरी है शिक्षक | शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं | प्राचीन काल से ही गुरुओं का हमारे जीवन में बड़ा योगदान रहा है | गुरुओं से प्राप्त ज्ञान और मार्गदर्शन से ही हम सफलता के शिखर तक पहुंच सकते हैं | शिक्षक दिवस पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है. इस दिन शिक्षकों को सम्मानित किया जाता है. क्या आप जानते हैं कि शिक्षक दिवस सितम्बर को ही क्यों मनाया जाता है आइये जानते है इसके बारे में-

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के अवसर पर उनकी स्मृति में सम्पूर्ण भारत में सितंबर को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जाता है. वह एक महान शिक्षक होने के साथ-साथ स्वतंत्र भारत के पहले उपराष्ट्रपति तथा दूसरे राष्ट्रपति थे | गुरु का हर एक के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है और इसलिए कहा गया है कि-

ऐसा कहा जाता है कि गुरु अर्थात शिक्षक के बिना सही रास्तों पर नहीं चला जा सकता है. वह मार्गदर्शन करते है. तभी तो शिक्षक छात्रों को अपने नियमों में बांधकर अच्चा इंसान बनाते हैं और सही मार्ग प्रशस्त करते रहते है. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि जन्म दाता से बढकर महत्व शिक्षक का होता है क्योंकि ज्ञान ही इंसान को व्यक्ति बनाता हैजीने योग्य जीवन देता हैं |

भारत में शिक्षक दिवस कैसे मनाया जाता है-

इस दिन स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती हैंउत्सवकार्यक्रम आदि होते हैं. शिक्षक अपने टीचर्स को गिफ्ट देते हैं. कई प्रकार कि सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती है जिसमे छात्र और शिक्षक दोनों ही भाग लेते है. गुरु-शिष्य परम्परा को कायम रखने का संकल्प लेते हैं |

यह दिन शिक्षक और छात्रों अर्थार्थ यू कहें तो समाज के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण होता है | इसी दिन शिक्षको को मान-सम्मान देकर उनके काम की सराहना करते है. एक शिक्षक के बिना कोई भी डॉक्टरइंजीनियर आदि नहीं बन सकता है. शिक्षा का असली ज्ञान सिर्फ एक शिक्षक ही दे सकता है |

शिक्षक दिवस को मनाने कि तिथियां अलग-अलग देशों में भिन्न हैं. क्या आप जानते हैं कि यूनेस्को ने आधिकारिक रूप में 'शिक्षक दिवसको मनाने के लिए अक्टूबर को चुना अब इसलिए 100 से अधिक देशों में यह 'शिक्षक दिवसके रूप में मनाया जाता है |

अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि सितंबर का दिन डॉ. राधाकृष्णन के जन्मदिन के रूप में ही नहीं बल्कि शिक्षकों के प्रति सम्मान और लोगों में शिक्षा के प्रति चेतना जगाने के लिए भी मनाया जाता है |










पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर, मथुरा 

Tuesday, August 29, 2023

राष्ट्रीय खेल दिवस (29 अगस्त)


केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में 29 अगस्त हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया गया। ध्यानचंद जी ने हॉकी में अपने परिश्रम, प्रतिभा और खेल भावना के बल पर जीवन में हर ऊँचाई को पाया जो आज भी खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है। मेजर ध्यानचंद जी को भारत रत्न मिलना चाहिए।
भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस 29 अगस्त को महान हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद की जयंती पर मनाया जाता है। 1928, 1932 और 1936 में भारत के लिए ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले हॉकी खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद सिंह का आज जन्मदिन है। उन्होंने 1926 से 1949 तक अपने करियर में 570 गोल किए। ये अपने आप में बड़ी बात है। 

     आज यानी 29 अगस्त को भारत नेशनल स्पोर्ट्स डे मना रहा है। इससे एक दिन पहले यानी 28 अगस्त को भारतीय क्रिकेट टीम ने देशवासियों को झूमने का मौका दिया, जब एशिया कप 2022 में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 5 विकेट से जीत दर्ज की। भारत ही नहीं, कई और देश भी राष्ट्रीय खेल दिवस मनाते हैं, लेकिन सभी की डेट्स अलग हैं। 
राष्ट्रीय खेल दिवस विभिन्न देशों में राष्ट्रीय खेल टीमों और उन देशों की खेल परंपराओं का सम्मान करने के लिए मनाया जाने वाला एक सार्वजनिक अवकाश है। इस दिन विभिन्न आयु वर्ग के लोग कबड्डी, मैराथन, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल, हॉकी और तमाम तरह के खेलों में हिस्सा लेते हैं। देशभर में खेल से जुड़ी सैकड़ों प्रतियोगिताएं होती हैं। इसके साथ-साथ कई बार खेल पुरस्कारों का भी ऐलान इसी दिन होता है। 

यह दिन देश के खेल नायकों और चैंपियनों को भी समर्पित है, जो देश को गौरवान्वित करने की दिशा में उनके योगदान और समर्पण का सम्मान करते हैं। खेल के मूल्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य के अलावा अनुशासन, दृढ़ता, खिलाड़ी भावना, टीम वर्क और बड़े पैमाने पर जनता को खेलों को लेने के लिए प्रोत्साहित करना भी इसमें शामिल है।

इसके अलावा स्पोर्ट्स डे को मनाने का एक और कारण ये है कि खिलाड़ी और युवा फिट और स्वस्थ होने के महत्व को समझें। खेल ही नहीं, बल्कि फिटनेस और स्वास्थ्य को भी अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाना है। भारत सरकार ने फुटबॉल, रनिंग, खो-खो, टेनिस, हॉकी, बैडमिंटन, वॉलीबॉल, हैंडबॉल, बास्केटबॉल और टेबल टेनिस के अलावा कई अन्य फन एक्टिविटीज स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों से आयोजित कराने का आहवान किया है।

राष्ट्रीय खेल दिवस की सभी खिलाड़ियों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
#National Sports Day@2023


पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा 

Tuesday, August 15, 2023

सभी देशवाशियों को स्वतंत्रता दिवस की @77 वीं वर्षगांठ की ढ़ेर शुभकामनाएं |


केन्द्रीय विधालय रिफानरी नगर मथुरा द्वारा आजादी की 77 वर्षगांठ पर विद्यालय परिवार के सभी सदस्य को बधाई।💐💐
स्‍वतंत्रता दिवस-
भारत का स्‍वतंत्रता दिवस हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में हर्ष उल्‍लास के साथ मनाया जाता है । यह प्रत्‍येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। इस दिन 200 वर्ष से अधिक समय तक ब्रिटिश उपनिवेशवाद के चंगुल से छूट कर एक नए युग की शुरूआत हुई थी। 15 अगस्‍त 1947 वह भाग्‍यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्‍वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई। भारत द्वारा आजादी पाना उसका भाग्‍य था, क्‍योंकि स्‍वतंत्रता संघर्ष काफी लम्‍बे समय चला और यह एक थका देने वाला अनुभव था, जिसमें अनेक स्‍वतंत्रता सेनानियों ने अपने जीवन कुर्बान कर दिए।

पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा 

Saturday, August 12, 2023

राष्ट्रीय पुस्तकालयाध्यक्ष दिवस

 



12 अगस्त को भारत में  के रूप में मनाया जाता है

डॉ. एसआर रंगनाथन (1892-1972)

रंगनाथन, जन्म 12 अगस्त 1892 को हुआ था, ब्रिटिश एब्यूरो भारत में एक मध्यम पृष्ठभूमि से आए थे। उनका जन्म दक्षिणी भारत के तमिल राज्य के छोटे शहर सियाली (अब सिरकाज़ी के नाम से जाना जाता है) में हुआ था।
कलरनाथन ने अपना व्यावसायिक जीवन एक गणितज्ञ के रूप में शुरू किया; उन्होंने अपने गृह प्रांत मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से गणित में बीए और एमए की डिग्री हासिल की और फिर शिक्षण लाइसेंस हासिल किया। उनका लक्ष्य गणित पढ़ना था, और वह खगोलीय रूप से मैंगलोर, कोयंबटूर और मद्रास के छात्रों में गणित गणित के रहे (सभी पांच साल की अवधि के अंदर)। गणित के प्रोफेसर के रूप में, उन्होंने डॉयचे भर पत्र प्रकाशित किया, जिसमें से अधिकांश गणित के इतिहास पर थे।एक शिक्षक के रूप में उनके शिष्य में हकलाने की समस्या (रंगनाथन ने अपने पेशेवर जीवन में धीरे-धीरे एक अमीर व्यक्ति पर आस्तिक पा लिया) के कारण कुछ हद तक बाधा उत्पन्न हुई। भारत सरकार ने डॉ. के लिए पुस्तकालय विज्ञान में योगदान दिया। एसआर रंगनाथन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

पुस्तकालय विज्ञान के पाँचवें नियम:
• पुस्तकें उपयोग के लिए हैं
• हर पाठक अपनी किताब
• हर किताब, अपना पाठक
• पाठक का समय बचाएं
• पुस्तकालय एक बड़ा हुआ जीव है

पुस्तकालय विज्ञान के राष्ट्रीय प्रोफेसर डॉ. एस आर की याद में 12 अगस्त को भारत में राष्ट्रीय पुस्तकालय प्रमुख दिवस के रूप में मनाया जाता है। रंगनाथन (1892-1972), भारत में पुस्तकालय विकास का नेतृत्व किया।

Monday, July 31, 2023

मुंशी प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई)

आज दिनाँक 31/07/2023 को पुस्तकालय केंद्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मना रहा हैं।
मुंशी प्रेमचंद (जन्म- 31 जुलाई, 1880 - मृत्यु- 8 अक्टूबर, 1936) भारत के उपन्यास सम्राट माने जाते हैं जिनके युग का विस्तार सन् 1880 से 1936 तक है। यह कालखण्ड भारत के इतिहास में बहुत महत्त्व का है। इस युग में भारत का स्वतंत्रता-संग्राम नई मंज़िलों से गुजरा। प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपत राय श्रीवास्तव था। वे एक सफल लेखक, देशभक्त नागरिक, कुशल वक्ता, जिम्मेदार संपादक और संवेदनशील रचनाकार थे। बीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध में जब हिन्दी में काम करने की तकनीकी सुविधाएं नहीं थीं फिर भी इतना काम करने वाला लेखक उनके सिवा कोई दूसरा नहीं हुआ।

कृतियां-
 
प्रेमचंद की कृतियां भारत के सर्वाधिक विशाल और विस्तृत वर्ग की कृतियां हैं। उन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक, समीक्षा, लेख, सम्पादकीय, संस्मरण आदि अनेक विधाओं में साहित्य की सृष्टि की, किन्तु प्रमुख रूप से वह कथाकार हैं। उन्हें अपने जीवन काल में ही उपन्यास सम्राट की पदवी मिल गई थी। उन्होंने कुल 15 उपन्यास, 300 से कुछ अधिक कहानियां, 3 नाटक, 10 अनुवाद, 7 बाल-पुस्तकें तथा हज़ारों पृष्ठों के लेख, सम्पादकीय, भाषण, भूमिका, पत्र आदि की रचना की। जिस युग में प्रेमचंद ने कलम उठाई थी, उस समय उनके पीछे ऐसी कोई ठोस विरासत नहीं थी और न ही विचार और न ही प्रगतिशीलता का कोई मॉडल ही उनके सामने था सिवाय बांग्ला साहित्य के। उस समय बंकिम बाबू थे, शरतचंद्र थे और इसके अलावा टॉलस्टॉय जैसे रुसी साहित्यकार थे। लेकिन होते-होते उन्होंने गोदान जैसे कालजयी उपन्यास की रचना की जो कि एक आधुनिक क्लासिक माना जाता है। 
 
पुरस्कार -
 
मुंशी प्रेमचंद की स्मृति में भारतीय डाक विभाग की ओर से 31 जुलाई, 1980 को उनकी जन्मशती के अवसर पर 30 पैसे मूल्य का एक डाक टिकट जारी किया। गोरखपुर के जिस स्कूल में वे शिक्षक थे, वहां प्रेमचंद साहित्य संस्थान की स्थापना की गई है। इसके बरामदे में एक भित्तिलेख है। यहां उनसे संबंधित वस्तुओं का एक संग्रहालय भी है। जहां उनकी एक आवक्षप्रतिमा भी है। प्रेमचंद की पत्नी शिवरानी देवी ने प्रेमचंद घर में नाम से उनकी जीवनी लिखी और उनके व्यक्तित्व के उस हिस्से को उजागर किया है, जिससे लोग अनभिज्ञ थे। उनके ही बेटे अमृत राय ने 'क़लम का सिपाही' नाम से पिता की जीवनी लिखी है। उनकी सभी पुस्तकों के अंग्रेज़ी व उर्दू रूपांतर तो हुए ही हैं, चीनी, रूसी आदि अनेक विदेशी भाषाओं में उनकी कहानियां लोकप्रिय हुई हैं। 
मुंशी प्रेमचंद की कृतियों को पढ़ने के लिए क्लिक करें 👇
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय 
रिफाइनरी नगर, मथुरा 




LIBRARY ACTIVITIES

कक्षा 12वीं का विदाई समारोह(सत्र 2025-2026)

      पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती में  दिनाँक 07/02/2026 (शनिवार) को विदाई समारोह का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। ...