Saturday, April 23, 2022

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस (23 अप्रैल)


 
 
 

World Book and Copyright Day 2023

आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस (23 अप्रैल)  मना रहा हैं साथ ही उन सभी लेखकों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करता हैं जिन्होनें अपनी लेखिनी के द्वारा समाज एवं देश को एक नई दिशा दी |

23 अप्रैल को वर्ल्ड बुक डे के रूप में मनाने की एक वजह ये भी है कि इस दिन कई प्रमुख लेखक या पैदा हुए थे या उनकी मृत्यु हो गई थी. विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का 23 अप्रैल को निधन हुआ था

किताबों के महत्व को बताने के लिए हर साल 23 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका प्रमुख उद्देश्य किताबों को पढ़ना, उनका प्रकाशन तथा प्रकाशन से सम्बंधित अधिकारों को पूरी दुनिया में बढ़ावा देना है. आमतौर पर इसे लेखकों, चित्रकारों आदि को प्रोत्साहन देने के रूप में भी मनाया जाता है |

क्यों 23 अप्रैल को मनाया जाता है वर्ल्ड बुक डे

23 अप्रैल को वर्ल्ड बुक डे के रूप में मनाने की एक वजह ये भी है कि इस दिन कई प्रमुख लेखक या पैदा हुए थे या उनकी मृत्यु हो गई थी. विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का 23 अप्रैल को निधन हुआ था जबकि मैनुएल मेजिया वल्लेजो और मौरिस ड्रून 23 अप्रैल के दिन पैदा हुए थे  |

विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस की तैयारी में यूनेस्को ने लोगों को अपने आप को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वह अपने सामान्य से नए विषयों, स्वरूपों या शैलियों का पता लगा सकें. हमारा लक्ष्य लोगों को पढ़ने में संलग्न करना है. इस वर्ष के विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के उत्सव के रूप में यूनेस्को ने एक 'बुकफेस' चुनौती का निर्माण किया है |

World Book & Copyright Day 2023, Theme: इस साल की थीम है 'इंडिजेनस लैंग्वेजेज' (Indigenous Languages) यानी स्वदेशी भाषाएं है। इस थीम के पीछे सोच यह है कि हमें देश दुनिया की अनेक भाषाओं का महत्व समझना चाहिए। वो भाषाएं जो हमारे रिच कल्चर का प्रतीक है और जो अपने अनोखे स्टोरीटेलिंग और राइटिंग के माध्यम से हमें एक नयी राह दिखती है। इस थीम को रखने की एक वजह ये भी है की हमें अपनी स्वदेशी भाषा की कद्र करनी चाहिए और उन्हें विलुप्त होने से बचाना चाहिए। इन भाषाओं में ज्ञान के साथ साथ गहरी सोच, समझ और दृष्टिकोण छुपा है।

UNESCO के महानिदेशक, ऑड्रे अज़ोले ने 2023 के लिए अकरा (घाना) को UNESCO की विश्व पुस्तक राजधानी (WB) के रूप में नामित किया है।

विश्व पुस्तक दिवस 2022 थीम

गाम्बिया और वैश्विक समुदाय ने इस वर्ष के विश्व कॉपीराइट और पुस्तक दिवस की थीम 'आर यू ए रीडर' रखी है. प्रत्येक वर्ष, यूनेस्को और अंतर्राष्ट्रीय संगठन पुस्तक उद्योग के तीन प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें प्रकाशक, बुकसेलर, और पुस्तकालय को शामिल किया जाता है. अपनी स्वयं की पहल के माध्यम से एक साल की अवधि के लिए विश्व पुस्तक राजधानी का चयन करते हैं. यूनेस्को के अनुसार, जॉर्जिया में त्बिलिसी शहर को 2021 के लिए विश्व पुस्तक राजधानी के रूप में चुना गया था. जबकि इस वर्ष गाम्बिया को चुना गया है |

दुनिया में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है वर्ल्ड बुक डे

दुनिया के विभिन्न देशों में वर्ल्ड बुक डे को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. कहीं पर मुफ्त में पुस्तकें वितरित की जाती हैं तो कहीं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. स्पेन में दो दिनों तक रीडिंग मैराथन का आयोजन किया जाता है. इसके अंत में एक लेखक को मिगेल डे सरवांटिस पुरस्कार से नवाजा जाता है. इस दिन स्वीडन में स्कूलों में और कॉलेजो में लेखन प्रतियोगिता का आयोजन होता है |

आज  विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस की बधाइयां

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पुस्तके हमें देती ज्ञान का भंडार 

पुस्तकों में सजा विश्व का आकार 

पुस्तकें बताती भूत और भविष्य  

पुस्तकों में जीवन का पूरा संसार।

                                  

पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफ़ाइनरी नगर मथुरा

Friday, April 22, 2022

'विश्व पृथ्वी दिवस'(22 अप्रैल)


    आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा विश्व पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) के अवसर पर उन सभी विभूतियों को नमन और याद करता है जिन्होंने पृथ्वी एवं पर्यावरण को बचाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया                                        

वर्ल्ड अर्थ डे यानी विश्व पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है. ये दिन एक मौका होता है जब करोड़ों लोग मिलकर पृथ्वी से जुड़ी पर्यावरण की चुनौतियों जैसे कि, क्लाइमेट चेंज. ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और जैवविविधता संरक्षण के लिए प्रयास करने में और जागरुक हों और इसमें तेजी लाएं. इस दिन को इंटरनेशनल मदर अर्थ डे के रूप में भी जाना जाता है. इसे मनाने का मकसद यही है कि लोग पृथ्वी के महत्‍व को समझें और पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने के प्रति जागरूक हों. यही वजह है कि इस दिन पर्यावरण संरक्षण और पृथ्वी को बचाने का संकल्प लिया जाता है |

विश्व पृथ्वी दिवस के दिन पेड़ लगाकर, सड़क के किनारे कचरा उठाकर, लोगों को टिकाऊ जीवन जीने के तरीके अपनाने के लिए प्रेरित करने जैसे विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करके सेलिब्रेट किया जाता है. इसके अलावा बच्चों में जागरूकता फैलाने के लिए इस दिन स्कूलों और विभिन्न समाजिक संस्थाओं द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं |

इस दिन का महत्व 
साल 1970 से हर साल 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाया जाता है. इस दिन को जैव विविधता के नुकसान, बढ़ते प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय मुद्दों को उजागर करने के लिए मनाया जाता है. इस दिन अर्थ डे ऑर्गेनाइजेशन (पूर्व में अर्थ डे नेटवर्क) द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसमें 193 देशों के 1 बिलियन से अधिक लोग शामिल हैं |

क्या है साल 2022 की थीम
इस साल वर्ल्ड अर्थ डे की थीम है, ‘इन्वेस्ट इन आवर अर्थ’. मतलब ‘हमारी पृथ्वी में निवेश करें’. इसमें मुख्य बिंदू (की प्वाइंट) है साहसिक तरीके से काम करना, व्यापक रूप से इनोवेशन करना और न्यायसंगत तरीके से लागू करना है. इससे पहले साल 2021 में वर्ल्ड अर्थ डे की थीम ‘रिस्टोर अवर अर्थ’ और साल 2020 की थीम ‘क्लाइमेट एक्शन’ थी |

इतिहास
विश्व पृथ्वी दिवस ग्लोवल स्तर पर 192 देशों द्वारा मनाया जाता है. 60-70 के दशक में जंगलों और पेड़ों की अंधाधुन्ध कटाई को देखते हुए सितम्बर 1969 में सिएटल, वाशिंगटन में एक सम्मलेन में विस्कोंसिन के अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने इसे मनाने की घोषणा की. इस राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन में अमेरिका के स्कूल और कॉलेजों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. और इस सम्मेलन में 20 हजार से अधिक लोग इक्कट्ठा हुए. साल 1970 से लगातार ये दिवस मनाया जा रहा है |

  • पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

 

Tuesday, April 5, 2022

PUSTAKOPAHAR

 

WELCOME TO ALL LIBRARY MEMBERS IN NEW SESSION 2022-23. 

NEW SESSION STARTED WITH NEW HOPE . GIFT BOOKS AND GET FRIENDS .PUSTAKOPAHARA GREAT INITIATIVE STARTED BY KENDRIYA VIDYALAYA SANGATHAN TO DONATE OLD BOOKS TO JUNIORS . OUR VIDYLAYA ALSO CELEBRATING THIS AS A FESTIVAL . STUDENTS DOING THIS WILLINGLY TO SPREAD MESSAGE OF SHARING IS CARING ” AND BEING ENVIRONMENT FRIENDLY .








LIBRARY KV MRN MATHURA

Wednesday, March 30, 2022

Pariksha Pe Charcha 2022

 

Pariksha Pe Charcha 2022

             माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, एक अप्रैल 2022 को ‘परीक्षा पे चर्चा’ (पीपीसी) के दौरान विद्यार्थी,शिक्षक और अभिभावक से चर्चा करेंगे. इसके लिए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और पीएम मोदी ने कार्यक्रम में परीक्षा का उत्सव मनाने का आह्वान किया है. इस कार्यक्रम का आयोजन एक अप्रैल को नयी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में होगा. बता दें कि ‘परीक्षा पे चर्चा’ के दौरान प्रधानमंत्री छात्रों से संवाद करते हैं. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय पिछले चार साल से इसका आयोजन कर रहा है.

स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ प्रधानमंत्री के इस संवाद कार्यक्रम का पहला संस्करण यहां तालकटोरा स्टेडियम में 16 फरवरी, 2018 को आयोजित किया गया था. इसके बाद पीपीसी के दूसरे और तीसरे संस्करण का आयोजन नयी दिल्ली में एक संवादात्मक ‘टाउन-हॉल’ प्रारूप में आयोजित किए गए थे. जबकि चौथा संस्करण पिछले साल सात अप्रैल को ऑनलाइन आयोजित किया गया था. वहीं इस साल ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के पांचवें संस्करण का आयोजन 1 अप्रैल 2022 को तालकटोरा स्टेडियम में किया जाएगा.

पीपीसी 2022 के लिए 12.12 लाख से अधिक छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। इस वर्ष के पीपीसी के लिए 2.71 लाख से अधिक शिक्षकों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया है कि इस कार्यक्रम में मोदी छात्रों को परीक्षा के तनाव से मुक्ति के तरीके बताएंगे. प्रधान ने ट्वीट किया, “हर युवा जिस संवाद का इंतजार कर रहा है वह एक अप्रैल 2022 को होगा. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से तनाव को कम करने और परीक्षा में सफल होने के तरीके जानिए और सलाह लीजिये. परीक्षा योद्धा, माता पिता और शिक्षक पीपीसी 2022 के लिए तैयार हो जाइये.”

पीएम मोदी ने किया ट्वीट-
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा कि ‘‘परीक्षा पे चर्चा एक संवाद होता है और यह हम सभी को परीक्षाओं, पढ़ाई, जीवन एवं अन्य विषयों संबंधी विभिन्न पहलुओं पर बात करने का अवसर देता है…’’

एक अप्रैल 2022 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा के लाइव प्रसारण की तैयारी केंद्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर,मथुरा द्वारा प्रारंभ कर दी गई है। इस संदर्भ में विद्यालय प्राचार्य श्री एस०के० अग्निहोत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री परीक्षा पर चर्चा के पांचवें संस्करण के दौरान दुनिया भर के छात्रों, शिक्षकों ओर अभिभावकों के साथ बातचीत करेंगे। परीक्षा पर चर्चा एक बहुत बड़ी बात है । यह प्रतीक्षित वार्षिक कार्यक्रम है जिसमें प्रधानमंत्री एक जीवंत कार्यक्रम में अपनी अनूठी आकर्षण शैली में छात्रों द्वारा परीक्षा के तनाव संबंधित क्षेत्रों से संबंधित सवालों के जवाब देते हैं। जिससे बच्चे काफी प्रभावित होते हैं।

देश के कोरोना महामारी से बाहर आने और परीक्षाओं के आफलाइन मोड में जाने के मद्देनजर इस वर्ष की पीपीसी के महत्व को रेखांकित किया। 21वीं सदी की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के निर्माण में पीपीसी जैसे पहलुओं के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि पीपीसी एक औपचारिक संस्था बन रही है। जिसके माध्यम से प्रधानमंत्री सीधे छात्रों से बातचीत करते हैं। बच्चों को दूरदर्शन चैनल के अलावा यू-ट्यूब एवं अन्य माध्यमों के तहत प्रधानमंत्री की बातों को सुनाया एवं दिखाया जाएगा। इस अवसर पर विद्यालय में सभी शिक्षक,कर्मचारी,विद्यार्थी एवं अभिभावक 1 अप्रैल 2022 को आमन्त्रित हैं



·              पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

Tuesday, March 8, 2022

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च)

 




अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-

    आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (मार्च) के अवसर पर उन सभी महिलाओं को नमन और याद करता है जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित किए तथा समाज एवं देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया

        अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) केवल एक दिन नहीं है, बल्कि आधी आबादी की पूरी कहानी को जश्न के रूप में मनाने का दिन होता है।ये दिन महिलाओं को समर्पित है। आज आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल हर क्षेत्र महिलाओं की उपलब्धियों से भरा हुआ है। ये दिन इन्हीं उपलब्धियों को सलाम करने का दिन है। इसके अलावा इन दिन का मकसद महिलाओं के अधिकारों को लेकर जागरुकता फैलाना भी है ताकि उन्हें उनका हक मिल सके और वह पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

      इस दिन न केवल महिलाएं अपनी खुशी जाहिर करती हैं, बल्कि हर पुरुष भी उनका आदर - सत्कार और उन्हें प्रोत्साहित करता है, ताकि समाज में लिंग भेदभाव ना हो। धरती से लेकर पाताल तक हर क्षेत्र के निर्माण में महिलाओं का अतुलनीय योगदान रहा है। महिलाएं ही बिजनस, उद्यमी कार्यों और वेतनरहित श्रम के रूप में अर्थव्यवस्था में काफी बड़ा योगदान देती हैं। कॉरपोरेट्स जगत की बात करें तो आज हर बड़े पद पर महिलाओं का ही वर्चस्व है। भारत जैसे पुरुष प्रधान देश में भी महिलाओं ने अपने कौशल कार्य से अपनी अलग पहचान बनाई और साथ ही मां, बहन, बेटी, पत्नी, प्रेमिका और दोस्त के रूप में अहम् भूमिका निभाई है।

     अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सबसे पहले अमेरिका में 1909 में मनाया गया था। तब करीब 15000 महिलाओं ने न्यूयॉर्क सिटी में वोटिंग के अधिकार, काम के घंटे कम करने व बेहतर वेतन की मांग को लेकर आंदोलन किया था। 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने थीम के साथ इसे मनाना शुरू किया। इस बार की थीम है - जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो यानी मजबूत भविष्य के लिए लैंगिक समानता जरूरी है।

     यह बात सही है कि महिलाएं हर क्षेत्र में परचम लहरा रही है। लेकिन यह भी कटु सत्य है कि आज भी कई जगहों पर उन्हें लैंगिक असमानता, भेदभाव झेलना पड़ता है। कन्या भ्रूण हत्या के मामले आज भी आते हैं। महिला के खिलाफ अपराध बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में हमारा यह कत्तर्व्य है हम महिलाओं की स्थिति समाज में बेहतर बनाने को लेकर प्रयासरत रहने का संकल्प लें। 

  • पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा






Monday, February 28, 2022

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2022

 

आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर महान भारतीय भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन  को स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज के लिए नमन और याद करता है.

 राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) हर साल 28 फरवरी को देश के विकास में वैज्ञानिकों के योगदान को चिह्नित करने और पहचानने के लिए मनाया जाता है। इस दिन, 1928 में, भारतीय भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन ने स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज की, जिसे 'रमन प्रभाव' कहा जाता है। यह दिन 'रमन प्रभाव' की खोज को समर्पित है। सीवी रमन को उनके काम के लिए 1930 में भौतिकी में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2022 का विषय 'सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण' (‘Integrated Approach in Science and Technology for Sustainable Future’) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को सोमवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं दीं और विज्ञान की शक्ति का लाभ मानव प्रगति के लिए उठाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आह्वान किया।

आइये नीचे दिए गए सवाल-जवाब की मदद से इस दिन के बारे में खास बातें जानते हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब और क्यों मनाते हैं?

सन् 1928 में प्रोफेसर सी.वी रमन ने कोलकाता में एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज/आविष्कार किया था जिसे रमन प्रभाव के नाम से संबोधित किया गया और उन्हें प्रसिद्धि मिली। 28 फरवरी 1930 को यह खोज प्रकाश में आई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। 1986 से हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक समारोह के रूप में मनाया जाता है।

उनके द्वारा किए गए सफल प्रयास को भविष्य में सदा के लिए याद रखने के लिए सन् 1986 में National council for science & technology communication द्वारा 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में घोषित किया गया। उस दिन से ही भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में 28 फरवरी को यह दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य

  • इस दिवस को प्रति वर्ष मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों व विद्यार्थियों के बीच विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  • दिवस को मनाने का एक मुख्य मकसद भी है, चंद्रशेखर रमन व उनके रमन प्रभाव को सम्मान प्रदान करना।
  • वैज्ञानिक आविष्कारों की महत्वता बताना।
  • जो लोग वैज्ञानिक सोच रखते हैं उन्हें विज्ञान व वैज्ञानिक क्षेत्र में मौका प्रदान करना।
  • विज्ञान और वैज्ञानिक विकास पर चर्चा करना व नई तकनीकों को लागू करना।
  • मानव कल्याण व प्रगति के प्रति वैज्ञानिक क्षेत्र में हर गतिविधियों, उपलब्धियों व प्रयासों को प्रदर्शित करना।
  • जो बच्चे विज्ञान विषय में दिलचस्पी रखते हैं उन्हें विज्ञान क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों व खोजों के लिए प्रेरित करना, उन्हें विज्ञान के प्रति आकर्षित व जागरूक करना, विज्ञान तथा वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त उपलब्धियों के प्रति जागरूक करना।
  • प्रोफेसर सी.वी रमन की कुछ personal information
  • डॉक्टर सी.वी रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता का नाम चंद्रशेखर अय्यर था जो एस पी जी कॉलेज में भौतिक विषय के प्राध्यापक थे। उनकी माता का नाम पार्वती अम्मल था जो एक सुसंस्कृत घराने की थीं। रमन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा विशाखापत्तनम से प्राप्त की।

    वह एक तमिल ब्राह्मण परिवार के थे और वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत में कोई शोध कार्य किया। वर्ष 1907 से 1933 तक वहइंडियन एसोसिएशन ऑफ द कल्टीवेशनऑफ़ साइंस, कोलकाता पश्चिम बंगाल में कार्यरत थे। उस दौरान ही उन्होंने कई विषयों पर शोध कार्य किया। इन्हीं शोध कार्यों में से एक रमन प्रभाव भी रहा जो एक विशेष खोज साबित हुई थी।

  • वर्ष 1928 में उन्होंने ‘प्रकाश का वितरण’ की खोज की थी जिससे वह पूरे भारत में मशहूर हो गए थे।

    रमन पहले एशियाई थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1954 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ”भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था।

    राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उत्सव कैसे मनाया जाता है?

    इस दिन को celebrate करने के लिए देश के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजन किया जाता है और सभी वैज्ञानिक बहुत उत्साहसे इस दिवस को मनाते हैं। संपूर्ण भारत के सभी स्कूलों, कॉलेजों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर इस समारोह का आयोजन किया जाता है। इस दिन को खास बनाने के लिए इन आयोजनों में विभिन्न तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है जिसमें बच्चे व बड़े सभी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और अपने बेहतरीन प्रदर्शन से इस दिन को अहम बनाते हैं।

    राष्ट्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तत्वावधान में हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवसमनाया जाता है।

    देश के प्रत्येक वैज्ञानिक शैक्षणिक तकनीकी और अनुसंधान चिकित्सा आदि संस्थानों में यह दिवस प्रतिवर्ष बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

    इस उत्सव में भाषण प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, शोध प्रदर्शन, व्याख्या, विज्ञान मॉडल प्रदर्शनियां,विज्ञान विषय व अवधारणाओं पर आधारित विज्ञान प्रदर्शनी आदि शामिल किया जाता है।

  • वर्ष 1957 में उन्हें लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

  • वर्ष(2022) की थीम(National Science Day 2022 Theme):-

    हाल ही में देश के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 की थीम को लांच किया गया है। इस वर्ष यानी 2022 की थीम-“सतत् भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” रखी गई है, इंग्लिश में इसे Integrated Approach in S&T for Sustainable Future कहते हैं इसका उद्देश्य है विज्ञान से संबंधित सभी मुद्दों व विषयों की सार्वजनिक तौर पर सराहना करना व बढ़ावा देना।

    केंद्रीय राज्य मंत्री ने आने वाले दिनों में अवसर के लिए एक राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन के आयोजन की भी बात कही है।इस सम्मेलन आयोजन में केंद्र, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को भी मुख्य तौर पर शामिल किया जाएगा जिससे कि देश में भविष्य में पैदा होने वाली समस्याओं के लिए प्रभावी समाधान पर विचार विमर्श किया जा सके।

  • पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

Sunday, February 27, 2022

 

आज चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है. महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 को शहीद हुए थे.

केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करता है.

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 को शहीद हुए थे जबकि देश के इस महान सपूत का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा पर स्थान पर हुआ था. आजाद के पिता पंडित सीताराम तिवारी अकाल के समय उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक निवास बदरका को छोड़कर पहले कुछ दिनों मध्य प्रदेश के अलीराजपुर रियासत में नौकरी करते रहे, फिर जाकर भाबरा गांव बस गए. यहीं चन्द्रशेखर आजाद का बचपन बीता.

आजाद बचपन में आदिवासी इलाके में रहे इसलिए बचपन में ही उन्होंने निशानेबाजी सीख ली थी.

जिस वक्त जलियांवाला बाग में अंग्रेजी हुकूमत ने नरसंहार किया उस वक्त आजाद बनारस में पढ़ाई कर रहे थे. 1921 में महात्मा गांधी ने जब असहयोग आंदोलन चलाया तो आजाद भी सड़कों पर उतर गए. उन्हें गिरफ्तार भी किया गया लेकिन हर हाल में वह बंदे मातरम और महात्मा गांधी की जय ही बोलते रहे.

जब आजाद को अंग्रेजी सरकार ने असहयोग आंदोलन के समय गिरफ्तार किया और अदालत में उनसे उनका परिचय पूछा गया तो उन्होंने कहा- मेरा नाम आजाद और पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा पता जेल है.

लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद से ही उसका बदला लेने के लिए आजाद, राजगुरू और भगत सिंह ने योजना बनाई. 17 दिसंबर, 1928 को आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और ज्यों ही जे.पी. सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले, तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी. फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दागी. जब सांडर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया. इसके बाद लाहौर में जगह-जगह पोस्टर लगे कि लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है.

इसके बाद एक दिन उन्हें इलाहाबाद के एल्फ्रेड पार्क में उन्हें उनके मित्र सुखदेव राज ने बुलाया. वो बात कर ही रहे थे कि पुलिस ने उन्हें घेर लिया और गोलियां दागनी शुरू कर दी. दोनों ओर से गोलीबारी हुई. चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन में ये कसम खा रखी थी कि वो कभी भी जिंदा पुलिस के हाथ नहीं आएंगे. इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली.

जिस पार्क में उनका निधन हुआ था आजादी के बाद इलाहाबाद के उस पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क और मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे थे उसका नाम बदलकर आजादपुरा रखा गया.

पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा


LIBRARY ACTIVITIES

कक्षा 12वीं का विदाई समारोह(सत्र 2025-2026)

      पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती में  दिनाँक 07/02/2026 (शनिवार) को विदाई समारोह का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। ...