Monday, February 28, 2022

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2022

 

आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर महान भारतीय भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन  को स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज के लिए नमन और याद करता है.

 राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) हर साल 28 फरवरी को देश के विकास में वैज्ञानिकों के योगदान को चिह्नित करने और पहचानने के लिए मनाया जाता है। इस दिन, 1928 में, भारतीय भौतिक विज्ञानी चंद्रशेखर वेंकट रमन ने स्पेक्ट्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज की, जिसे 'रमन प्रभाव' कहा जाता है। यह दिन 'रमन प्रभाव' की खोज को समर्पित है। सीवी रमन को उनके काम के लिए 1930 में भौतिकी में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस साल राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2022 का विषय 'सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण' (‘Integrated Approach in Science and Technology for Sustainable Future’) है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों को सोमवार को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं दीं और विज्ञान की शक्ति का लाभ मानव प्रगति के लिए उठाने की प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आह्वान किया।

आइये नीचे दिए गए सवाल-जवाब की मदद से इस दिन के बारे में खास बातें जानते हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस कब और क्यों मनाते हैं?

सन् 1928 में प्रोफेसर सी.वी रमन ने कोलकाता में एक उत्कृष्ट वैज्ञानिक खोज/आविष्कार किया था जिसे रमन प्रभाव के नाम से संबोधित किया गया और उन्हें प्रसिद्धि मिली। 28 फरवरी 1930 को यह खोज प्रकाश में आई। इस महान खोज के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया। 1986 से हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस एक समारोह के रूप में मनाया जाता है।

उनके द्वारा किए गए सफल प्रयास को भविष्य में सदा के लिए याद रखने के लिए सन् 1986 में National council for science & technology communication द्वारा 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में घोषित किया गया। उस दिन से ही भारतीय विज्ञान के क्षेत्र में 28 फरवरी को यह दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने लगा।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाने का उद्देश्य

  • इस दिवस को प्रति वर्ष मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों व विद्यार्थियों के बीच विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करना।
  • दिवस को मनाने का एक मुख्य मकसद भी है, चंद्रशेखर रमन व उनके रमन प्रभाव को सम्मान प्रदान करना।
  • वैज्ञानिक आविष्कारों की महत्वता बताना।
  • जो लोग वैज्ञानिक सोच रखते हैं उन्हें विज्ञान व वैज्ञानिक क्षेत्र में मौका प्रदान करना।
  • विज्ञान और वैज्ञानिक विकास पर चर्चा करना व नई तकनीकों को लागू करना।
  • मानव कल्याण व प्रगति के प्रति वैज्ञानिक क्षेत्र में हर गतिविधियों, उपलब्धियों व प्रयासों को प्रदर्शित करना।
  • जो बच्चे विज्ञान विषय में दिलचस्पी रखते हैं उन्हें विज्ञान क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • विद्यार्थियों को विज्ञान के क्षेत्र में नए प्रयोगों व खोजों के लिए प्रेरित करना, उन्हें विज्ञान के प्रति आकर्षित व जागरूक करना, विज्ञान तथा वैज्ञानिकों द्वारा प्राप्त उपलब्धियों के प्रति जागरूक करना।
  • प्रोफेसर सी.वी रमन की कुछ personal information
  • डॉक्टर सी.वी रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली क्षेत्र में हुआ था। उनके पिता का नाम चंद्रशेखर अय्यर था जो एस पी जी कॉलेज में भौतिक विषय के प्राध्यापक थे। उनकी माता का नाम पार्वती अम्मल था जो एक सुसंस्कृत घराने की थीं। रमन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा विशाखापत्तनम से प्राप्त की।

    वह एक तमिल ब्राह्मण परिवार के थे और वह पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत में कोई शोध कार्य किया। वर्ष 1907 से 1933 तक वहइंडियन एसोसिएशन ऑफ द कल्टीवेशनऑफ़ साइंस, कोलकाता पश्चिम बंगाल में कार्यरत थे। उस दौरान ही उन्होंने कई विषयों पर शोध कार्य किया। इन्हीं शोध कार्यों में से एक रमन प्रभाव भी रहा जो एक विशेष खोज साबित हुई थी।

  • वर्ष 1928 में उन्होंने ‘प्रकाश का वितरण’ की खोज की थी जिससे वह पूरे भारत में मशहूर हो गए थे।

    रमन पहले एशियाई थे जिन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1954 में उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान ”भारत रत्न” से सम्मानित किया गया था।

    राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उत्सव कैसे मनाया जाता है?

    इस दिन को celebrate करने के लिए देश के विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा आयोजन किया जाता है और सभी वैज्ञानिक बहुत उत्साहसे इस दिवस को मनाते हैं। संपूर्ण भारत के सभी स्कूलों, कॉलेजों व अन्य शैक्षणिक संस्थानों पर इस समारोह का आयोजन किया जाता है। इस दिन को खास बनाने के लिए इन आयोजनों में विभिन्न तरह की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती है जिसमें बच्चे व बड़े सभी बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं और अपने बेहतरीन प्रदर्शन से इस दिन को अहम बनाते हैं।

    राष्ट्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी परिषद तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय तत्वावधान में हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवसमनाया जाता है।

    देश के प्रत्येक वैज्ञानिक शैक्षणिक तकनीकी और अनुसंधान चिकित्सा आदि संस्थानों में यह दिवस प्रतिवर्ष बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।

    इस उत्सव में भाषण प्रतियोगिता, प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता, शोध प्रदर्शन, व्याख्या, विज्ञान मॉडल प्रदर्शनियां,विज्ञान विषय व अवधारणाओं पर आधारित विज्ञान प्रदर्शनी आदि शामिल किया जाता है।

  • वर्ष 1957 में उन्हें लेनिन शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

  • वर्ष(2022) की थीम(National Science Day 2022 Theme):-

    हाल ही में देश के केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) 2022 की थीम को लांच किया गया है। इस वर्ष यानी 2022 की थीम-“सतत् भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में एकीकृत दृष्टिकोण” रखी गई है, इंग्लिश में इसे Integrated Approach in S&T for Sustainable Future कहते हैं इसका उद्देश्य है विज्ञान से संबंधित सभी मुद्दों व विषयों की सार्वजनिक तौर पर सराहना करना व बढ़ावा देना।

    केंद्रीय राज्य मंत्री ने आने वाले दिनों में अवसर के लिए एक राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन के आयोजन की भी बात कही है।इस सम्मेलन आयोजन में केंद्र, राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को भी मुख्य तौर पर शामिल किया जाएगा जिससे कि देश में भविष्य में पैदा होने वाली समस्याओं के लिए प्रभावी समाधान पर विचार विमर्श किया जा सके।

  • पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

Sunday, February 27, 2022

 

आज चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि है. महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 को शहीद हुए थे.

केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन करता है.

महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद 27 फरवरी 1931 को शहीद हुए थे जबकि देश के इस महान सपूत का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के भाबरा पर स्थान पर हुआ था. आजाद के पिता पंडित सीताराम तिवारी अकाल के समय उत्तर प्रदेश के अपने पैतृक निवास बदरका को छोड़कर पहले कुछ दिनों मध्य प्रदेश के अलीराजपुर रियासत में नौकरी करते रहे, फिर जाकर भाबरा गांव बस गए. यहीं चन्द्रशेखर आजाद का बचपन बीता.

आजाद बचपन में आदिवासी इलाके में रहे इसलिए बचपन में ही उन्होंने निशानेबाजी सीख ली थी.

जिस वक्त जलियांवाला बाग में अंग्रेजी हुकूमत ने नरसंहार किया उस वक्त आजाद बनारस में पढ़ाई कर रहे थे. 1921 में महात्मा गांधी ने जब असहयोग आंदोलन चलाया तो आजाद भी सड़कों पर उतर गए. उन्हें गिरफ्तार भी किया गया लेकिन हर हाल में वह बंदे मातरम और महात्मा गांधी की जय ही बोलते रहे.

जब आजाद को अंग्रेजी सरकार ने असहयोग आंदोलन के समय गिरफ्तार किया और अदालत में उनसे उनका परिचय पूछा गया तो उन्होंने कहा- मेरा नाम आजाद और पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा पता जेल है.

लाला लाजपत राय की मृत्यु के बाद से ही उसका बदला लेने के लिए आजाद, राजगुरू और भगत सिंह ने योजना बनाई. 17 दिसंबर, 1928 को आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और ज्यों ही जे.पी. सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले, तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी. फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दागी. जब सांडर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया. इसके बाद लाहौर में जगह-जगह पोस्टर लगे कि लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है.

इसके बाद एक दिन उन्हें इलाहाबाद के एल्फ्रेड पार्क में उन्हें उनके मित्र सुखदेव राज ने बुलाया. वो बात कर ही रहे थे कि पुलिस ने उन्हें घेर लिया और गोलियां दागनी शुरू कर दी. दोनों ओर से गोलीबारी हुई. चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन में ये कसम खा रखी थी कि वो कभी भी जिंदा पुलिस के हाथ नहीं आएंगे. इसलिए उन्होंने खुद को गोली मार ली.

जिस पार्क में उनका निधन हुआ था आजादी के बाद इलाहाबाद के उस पार्क का नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क और मध्य प्रदेश के जिस गांव में वह रहे थे उसका नाम बदलकर आजादपुरा रखा गया.

पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा


Monday, February 21, 2022

अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस



आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया गया |
विश्वभर में 21 फरवरी को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” मनाया जाता है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य दुनिया भर में अपनी भाषा-संस्कृति (Language culture) के प्रति लोगों में रुझान पैदा करना और जागरुकता फैलाना है. वर्ष 1999 में मातृभाषा दिवस मनाने की घोषणा यूनेस्को (UNESCO) द्वारा की गई थी. वर्ष 2000 में पहली बार इस दिन को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के रूप में मनाया गया था.

जाने इस दिन का इतिहास

वर्ष 1952 में ढाका यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मातृभाषा का अस्तित्व बनाए रखने के लिए 21 फरवरी को एक आंदोलन किया गया था. इसमें शहीद हुए युवाओं की स्मृति में ही यूनेस्को ने पहली बार वर्ष 1999 में 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी. इस दिवस को पहली बार वर्ष 2000 में “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के रूप में मनाया गया था.

वर्ष 2021 की थीम

अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के लिए यूनेस्को द्वारा हर साल एक थीम (विषय) निर्धारित की जाती है. इस दिन दुनिया भर में भाषा और संस्कृति से जुड़े अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. ज्यादातर कार्यक्रम निर्धारित की गयी थीम पर ही आधारित होते हैं. वर्ष 2021 के लिए इस दिन की थीम रखी गई है, “Fostering multilingualism for inclusion in education and society” यानि “शिक्षा और समाज में समावेश के लिए बहुभाषावाद को बढ़ावा देना”.

ये है इस दिन को मनाने का उद्देश्य

मनुष्य के जीवन में भाषा की अहम भूमिका है. भाषा के ज़रिये ही देश और विदेशों के साथ संवाद स्थापित किया जा सकता है. इसके महत्त्व को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष 21 फरवरी के दिन को “अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस” के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को मनाये जाने का उद्देश्य विश्व भर में भाषायी और सांस्कृतिक विविधता एवं बहुभाषिता का प्रसार करना और दुनिया में विभिन्न मातृभाषाओं के प्रति जागरुकता लाना है.

विश्व भर में बोली जाती हैं इतनी भाषाएं, भारत में हैं 1652 भाषाएं

विश्व में जो भाषाएं सबसे ज्यादा बोली जाती हैं. उनमें अंग्रेजी, जैपनीज़, स्पैनिशहिंदी, बांग्ला, रूसी, पंजाबी, पुर्तगाली, अरबी भाषा शामिल हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार लगभग 6900 भाषाएं हैं जो विश्व भर में बोली जाती हैं. इनमें से 90 प्रतिशत भाषाएं बोलने वाले लोग एक लाख से भी कम हैं. भारत की बात करें तो 1961 की जनगणना के अनुसार, भारत में 1652 भाषाएं बोली जाती हैं.

पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

Sunday, January 30, 2022


 राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यानि मोहनदास करमचंद गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनीतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। राजनीतिक और सामाजिक प्रगति की प्राप्ति हेतु अपने अहिंसक विरोध के सिद्धांत के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। 

महात्मा गांधी के पूर्व भी शांति और अहिंसा के बारे में लोग जानते थे, परंतु उन्होंने जिस प्रकार सत्याग्रह, शांति व अहिंसा के रास्तों पर चलते हुए अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया, उसका कोई दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में देखने को नहीं मिलता। तभी तो संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी वर्ष 2007 से गांधी जयंती को ‘विश्व अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा की है। 
 गांधी जी के बारे में प्रख्यात वैज्ञानिक आइंस्टीन ने कहा था कि- 'हजार साल बाद आने वाली नस्लें इस बात पर मुश्किल से विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई इंसान भी धरती पर कभी आया था।
विश्व पटल पर महात्मा गांधी सिर्फ एक नाम नहीं अपितु शांति और अहिंसा का प्रतीक हैं। ऐसे महान व्यक्तित्व के धनी महात्मा गांधी की 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई।
30 जनवरी गांधी जी की पुण्यतिथि को सभी देशवासी शहीद दिवस के रूप मनाते है। 
  पुस्तकालय, केन्द्रीय विद्यालय 02,मथुरा ।

Wednesday, January 26, 2022

गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


आप सभी को विद्यालय परिवार की तरफ से 73वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
उनके हौंसले का मुकाबला ही नहीं है कोई

जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है

आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूंकि

सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….

स्वतन्त्र भारत के नागरिकों के लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही दिन बहुत विशेष हैं| इस दिन शहीदों की कुर्बानी को याद किया जाता है और वतन पर जान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है| ये दिन देश भक्तों के नाम है जिन्होंने हँसते हुए फांसी का फंदा चूम लिया ताकि हम लोग आजाद हिंदुस्तान में सांस ले सकें|

उन शहीदों को दिल से सलाम जिन्होंने अपने घर, परिवार और अपने प्राणों की चिंता ना करते हुए अपना सब कुछ देश के लिए न्यौछावर कर दिया और भारत माता को अंग्रेजी बेड़ियों से मुक्त कराया| हम उन शहीदों को दिल से नमन करते हैं और सौगंध लेते हैं कि उनका बलिदानन व्यर्थ नहीं जायेगा, हम भी अपने प्राणों की चिंता किये बगैर इस मातृभूमि की रक्षा करेंगे |

जय हिन्द जय भारत जय संविधान।🇮🇳

     पुस्तकालय, के o वि o,रिफाइनरी नगर,मथुरा

Monday, January 24, 2022

राष्ट्रीय बालिका दिवस(24 जनवरी)

 


राष्ट्रीय बालिका दिवस (National Girl Child Day) भारत में हर साल 24 जनवरी को मनाया जाता है. इसकी शुरुआत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने साल 2008 में की थी. इस दिन विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें सेव द गर्ल चाइल्ड, चाइल्ड सेक्स रेशियो और बालिकाओ के लिए स्वास्थ्य और सुरक्षित वातावरण बनाने सहित जागरूकता कार्यक्रम शामिल हैं. राष्ट्रीय बालिका दिवस को मनाने के लिए 24 जनवरी का दिन इसलिए चुना गया क्योंकि इसी दिन साल 1966 में इंदिरा गांधी ने भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी.

कन्या भ्रूण हत्या की वजह से लड़कों की तुलना में लड़कियों की संख्या कम है. लड़कियों की साक्षरता दर भी एशिया में सबसे कम है. एक सर्वे के अनुसार, भारत में 42 फीसदी लड़कियों को दिन में एक घंटे से कम समय मोबाइल फोन इस्तेमाल की इजाजत दी जाती है. अधिकांश अभिभावकों को यह लगता है कि मोबाइल फोन ‘असुरक्षित’ है और ये उनका ध्यान भंग करते हैं.

राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने का उद्देश्य -
-लोगों के बीच लड़कियों के अधिकार को लेकर जागरूकता पैदा करना और लड़कियों को नया अवसर मुहैया कराना

-यह सुनिश्चित करना कि हर लड़की को मानवीय अधिकार मिले

-लैंगिक असमानता को लेकर जागरूकता पैदा करना

-बालिकाओं की समस्या का समाधान

-महिलाओं को समाज में जिन असमानताओं का सामना करना पड़ता है, उन सभी से छुटकारा

राष्ट्रीय बालिका दिवस का महत्व
भारत सरकार ने समाज में समानता लाने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुरुआत की है. इस अभियान का उद्देश्य देशभर की लड़कियों को जागरूक करना है. साथ ही लोगों को यह बताना है कि समाज के निर्माण में महिलाओं का समान योगदान है. इसमें सभी क्षेत्रों के लोगों को शामिल किया गया है. उन्हें जागरुक किया गया है कि लड़कियों को भी निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए.

क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय बालिका दिवस
समाज में लड़कियों की स्थिति में सुधार के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाया जाता है. महिलाओ को अपने घरों, कार्यस्थलों और दैनिक जीवन में कई प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ता है. लड़कियों की स्थितियों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए इस दिन देशभर में कई कार्यक्रम और अभियान चलाए जाते हैं.

भारत में प्रत्येक बालिका के कुछ अधिकार हैं-
-लिंग भेदभाव के लिए अल्ट्रासाउंड परीक्षणों का उपयोग करना अवैध है.

-बाल विवाह पर प्रतिबंध है.

-राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की गई है.

-सरकार ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू की है.

-पिछड़े वर्ग की लड़कियों के लिए ओपन लर्निंग सिस्टम का बंदोबस्त.

-ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों  
के लिए बेहतरीन आजीविका सुनिश्चित करने के मकसद से कई स्वंय सहायता समूह काम कर रहे हैं.

राष्ट्रीय बालिका दिवस 2022 की थीम

हर साल राष्ट्रीय बालिका दिवस की थीम अलग होती है। बालिका दिवस साल 2021 की थीम 'डिजिटल पीढ़ी, हमारी पीढ़ी' थी। साल 2020 में बालिका दिवस की थीम 'मेरी आवाज, हमारा समान भविष्य' थी। साल 2022 बालिका दिवस की थीम की घोषणा फिलहाल नहीं हुई है।

दुश्मनों का मुकाबला डट के कर सकती है ‘बेटी’
मत बांधों बेड़ियों में ऊंची उड़ान भर सकती है ‘बेटी’

राष्ट्रीय बालिका दिवस की शुभकामनाएं…

पुस्तकालय,केन्द्रीय विद्यालय क्रं02,मथुरा

LIBRARY ACTIVITIES

कक्षा 12वीं का विदाई समारोह(सत्र 2025-2026)

      पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती में  दिनाँक 07/02/2026 (शनिवार) को विदाई समारोह का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। ...