कार्यक्रम का संचालन कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों द्वारा किया गया। कक्षा 11वीं के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना एवं विदाई गीत ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
पुस्तकालय,पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती
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केंद्रीय विद्यालय में आज 15/12/2025(सोमवार)को केन्द्रीय विद्यालय संगठन का 63वाॅं स्थापना दिवस साथ ही वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। जिसमें विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ ही खेलकूद प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। इस मौके पर बच्चों ने स्वागत गान एवं समूह नृत्य प्रस्तुतियां दी।
आज दिनाँक 26/01/2025 को केंद्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में 76वां गणतन्त्र दिवस बड़े धूमधाम एवं उत्साह के साथ मनाया गया|देश में हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। आप सभी को विद्यालय परिवार की तरफ से 76वें गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
उनके हौंसले का मुकाबला ही नहीं है कोई
जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है
आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूंकि
सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….
स्वतन्त्र भारत के नागरिकों के लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही दिन बहुत विशेष हैं| इस दिन शहीदों की कुर्बानी को याद किया जाता है और वतन पर जान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है| ये दिन देश भक्तों के नाम है जिन्होंने हँसते हुए फांसी का फंदा चूम लिया ताकि हम लोग आजाद हिंदुस्तान में सांस ले सकें|
उन शहीदों को दिल से सलाम जिन्होंने अपने घर, परिवार और अपने प्राणों की चिंता ना करते हुए अपना सब कुछ देश के लिए न्यौछावर कर दिया और भारत माता को अंग्रेजी बेड़ियों से मुक्त कराया| हम उन शहीदों को दिल से नमन करते हैं और सौगंध लेते हैं कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा, हम भी अपने प्राणों की चिंता किये बगैर इस मातृभूमि की रक्षा करेंगे |
जय हिन्द जय भारत जय संविधान।
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा
केंद्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में आज दिनांक 23/01/2025 को पराक्रम दिवस का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया । कार्यक्रम की शुरुआत प्राचार्य जी द्वारा नेताजी सुभाषचन्द्र बोस जी प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित करने के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय की छात्रा ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से संबंधित अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य जी ने अपने उदबोधन में नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का देश की आजादी में योगदान को रेखांकित एवं प्रेरक बातों को विद्यार्थियों के साथ साझा किए।
इस अवसर पर विद्यालय में जिला स्तरीय प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें जिले के विभिन्न विद्यालयों विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता में प्रथम,द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्राचार्य जी द्वारा प्रमाण - पत्र तथा पुरस्कार प्रदान किए गए।
पराक्रम दिवस 23 जनवरी को भारत में मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा 2021 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125 वीं जयन्ती से पहले इस दिवस को पराक्रम दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गयी थी।
देश की आजादी के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती को 'पराक्रम दिवस' के रूप में भी मनाया जाता है. ब्रिटिश शासन से देश की आजादी की लड़ाई के दौरान नेताजी के दिए नारों ने देशभक्ति की अलख जगा दी थी- तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हें आजादी दूंगा, जय हिन्द, दिल्ली चलो. इसमें से तो 'जय हिंद' का नारा राष्ट्रीय नारा बन गया।
सुभाष चंद्र बोस के बारे में 05 महत्वपूर्ण बातें -
1- सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी, 1897 में ओडिशा के कर्नाटक में एक बंगाली परिवार में हुआ था. इनकी मां का नाम प्रभावती और पिता का जानकीनाथ था।
2- आपको बता दें कि सुभाष चंद्र बोस 14 भाई बहन थे. जिसमें से ये 9वें नंबर पर थे।
3 - सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन सिविल सर्विस की परीक्षा भी पास की थी जिसमें उन्हें चौथा रैंक प्राप्त हुआ था, लेकिन उन्होंने अंग्रेजों से मुल्क की आजादी के लिए इस पद की बलि चढ़ा दी।
4 - देश की आजादी के लिए सुभाषचंद्र बोस ने 1943 में सिंगापुर में आजाद हिंद फौज सरकार की स्थापना की. जिसे 9 देशों की सरकारों ने मान्यता दी थी जिसमें जर्मनी, जापान और फिलीपींस भी शामिल थे।
5 - 18 अगस्त 1945 को ताइपई में हुए एक विमान दुर्घटना के बाद नेताजी लापता हो गए. इसके लिए 3 जांच आयोग बैठाए गए जिसमें से दो ने दुर्घटना के दौरान मृत्यु का दावा किया था जबकि तीसरी कमेटी का दावा था कि घटना के बाद सुभाष चंद्र बोस जिंदा थे।
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इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद जी के जीवन से संबंधित अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य जी ने स्वामी विवेकानंद जी से जुड़े प्रेरक बातों को विद्यार्थियों के साथ साझा किए तथा उनके बताएं मार्ग पर चलकर देश की प्रगति में युवाशक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।
हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाया जाता है। यह दिन स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। वही, स्वामी विवेकानंद जो आज भी देश के लाखों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं और भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली नेतृत्वकर्ताओं में से एक थे। प्रति वर्ष केंद्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों से लेकर, सामाजिक संगठन और रामकृष्ण मिशन के अनुयायी विवेकानंद जयंती बड़े सम्मान के साथ मनाते हैं।
भारत सरकार ने 1984 में 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में घोषित किया था। 1985 से प्रति वर्ष देश 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मना रहा है। स्वामी विवेकानंद के भाषण, उनकी शिक्षाएं और उद्धरण हमेशा युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे है।
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा
उन्होंने इस अवसर पर कहा कि हमारा लक्ष्य दक्षता आधारित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केन्द्रित शिक्षण प्रणाली द्वारा छात्रों का सर्वागीण विकास करना है। शिक्षा के क्षेत्र में केंद्रीय विद्यालय ने इस दौरान कई नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं। केन्द्रीय विद्यालय का नाम शिक्षकों के कठिन परिश्रम और छात्रों के बेहतर प्रदर्शन से आज प्रसिद्ध है। शिक्षण संस्थानों में सर्वोपरि है। देश में सन 1963 में 20 केन्द्रीय विद्यालयों से स्थापित यह संगठन आज 1250 से अधिक केन्द्रीय विद्यालयों के साथ देश तथा विदेश में 14 लाख से अधिक विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने भारत का स्वर्णिम गौरव केन्द्रीय विद्यालय लाएगा समूह गीत गाकर छात्रों और अध्यापकों को गौरवान्वित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय विद्यालय के एलुमनाई को आमन्त्रित किया गया जिन्होंने अपने अनुभव साझा किए जो कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत है।स्थापना दिवस के अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। जिसमें समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने हर्षोल्लास के साथ भाग लिया।
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केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में दिनांक 2 अक्टूबर 2024 को महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री जयंती समारोह आयोजित किया गया । साथ ही साथ स्वच्छता का संदेश स्वच्छता अभियान चलाकर दिया गया।
Gandhi Jayanti 2024 : हर वर्ष देश में 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती मनाई जाती है। यह बात सही है कि गांधी जी भारत की आजादी की लड़ाई में 1915 से सक्रिय हुए। और आजादी की जंग उसके कई दशकों पहले से चल रही थी। लेकिन गांधी जी की एंट्री ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में जबरदस्त जान फूंकी। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में गांधी जी भूमिका ने भारतीय समाज और राष्ट्रीयता को नए सिरे से गढ़ने में मदद की। उनकी अहिंसक नीतियों और नैतिक आधारों ने और अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ा। उन्होंने सभी धर्मों को एक समान मानने, सभी भाषाओं का सम्मान करने, पुरुषों और महिलाओं को बराबर का दर्जा देने और दलितों-गैर दलितों के बीच की युगों से चली आ रही खाई को पाटने पर जोर दिया।
2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत के दम पर अंग्रेजों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। उन्हीं के विचारों के सम्मान में 2 अक्टूबर को हर साल अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस भी मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस की तरह इस दिन राष्ट्रीय पर्व का दर्जा दिया गया है।
यहां पढ़ें गांधी जी से जुड़े रोचक तथ्य:
- महान आविष्कारक अल्बर्ट आइंस्टीन बापू से खासे प्रभावित थे। आइंस्टीन ने कहा था कि लोगों को यकीन नहीं होगा कि कभी ऐसा इंसान भी इस धरती पर आया था।
- वह कभी अमेरिका नहीं गए और न ही कभी प्लेन में बैठे।
-उनकी शवयात्रा में करीब दस लाख लोग साथ चल रहे थे और 15 लाख से ज्यादा लोग रास्ते में खड़े हुए थे।
- उन्हें 5 बार नोबल पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। 1948 में पुरस्कार मिलने से पहले ही उनकी हत्या हो गई।
- श्रवण कुमार की कहानी और हरिश्चन्द्र के नाटक को देखकर महात्मा गांधी काफी प्रभावित हुए थे।
- राम के नाम से उन्हें इतना प्रेम था की अपने मरने के आखिरी क्षण में भी उनका आखिरी शब्द राम ही था।
- साल 1930 में उन्हें अमेरिका की टाइम मैगजीन ने Man Of the Year से उपाधि से नवाजा था।
Lal Bahadur Shastri Jayanti : 2 अक्टूबर को राष्ट्रपिता गांधीजी के साथ-साथ देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की भी जयंती होती है। पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में 2 अक्टूबर 1904 को हुआ था। उनकी माता का नाम राम दुलारी था और पिता का नाम मुंशी प्रसाद श्रीवास्तव था। शास्त्री जी की पत्नी का नाम ललिता देवी था। काशी विद्या पीठ से उन्होंने स्नातक की पढ़ाई की थी। शास्त्री जी एक कुशल नेतृत्व वाले गांधीवादी नेता थे और सादगी भरी जीवन व्यतीत करते थे।
आइए जानते हैं लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़ी अहम बातें...
- लाल बहादुर शास्त्री ने विषम परिस्थितियों में शिक्षा हासिल की। कहा जाता है कि वह नदी तैरकर रोज स्कूल जाया करते थे। क्योंकि जब बहुत कम गांवों में ही स्कूल होते थे।
- 16 साल की उम्र में उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और गांधी जी के असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए।
- लाल बहादुर शास्त्री ने 1921 के असहयोग आंदोलन से लेकर 1942 तक अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। शास्त्री जी 16 साल की उम्र में गांधी जी के साथ देशवासियों के लिए असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए थे।
- लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बनने से पहले रेल मंत्री, परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री, गृह मंत्री एवं नेहरू जी की बीमारी के दौरान बिना विभाग के मंत्री रहे।
- 1964 में जब लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने। उनके शासनकाल में 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ।
- पाकिस्तान से युद्ध के दौरान देश में अन्न की कमी हो गई। देश भुखमरी की समस्या से गुजरने लगा था। उस संकट के काल में लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी तनख्वाह लेना बंद कर दिया था।
- 11 जनवरी, 1966 को ताशकंद में अंतिम सांस ली थी। 10 जनवरी, 1966 को ताशकंद में पाकिस्तान के साथ शांति समझौते पर करार के महज 12 घंटे बाद (11 जनवरी) लाल बहादुर शास्त्री की अचानक मृत्यु हो गई।
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विश्व योग दिवस-
विश्व योग दिवस को मनाये जाने की पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 27 सितम्बर, 2014 को 'संयुक्त राष्ट्र महासभा' में अपने भाषण में रखकर की थी, जिसके बाद '21 जून' को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' घोषित किया गया। 11 दिसम्बर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 193 सदस्यों द्वारा 21 जून को 'अंतरराष्ट्रीय योग दिवस' को मनाने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली। प्रधानमंत्री मोदी के इस प्रस्ताव को 90 दिन के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, जो संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव के लिए सबसे कम समय है ।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2024 की थीम-
इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम है 'स्वयं और समाज के लिए योग'। इस वर्ष एक विशेष मील का पत्थर है - अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की 10वीं वर्षगांठ। "स्वयं और समाज के लिए योग" विषय इस प्राचीन अभ्यास के सार को पूरी तरह से दर्शाता दें 27 सितंबर 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त महासभा में दुनिया के तमाम देशों से योग दिवस को मनाने का आह्वान किया।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का महत्व-
इस वर्ष के अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ योगा/आईडीवाई की विषय वस्तु उचित रूप से चित्रित करता है कि किस प्रकार कोविड-19 महामारी के चरम के दौरान, योग ने कष्टों को कम करने एवं कोविड-19 पश्चात उभरते हुए भू-राजनीतिक परिदृश्य में भी मानवता की सेवा की।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का इतिहास-
अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस का प्रस्ताव सबसे पहले भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा था। यह प्रस्ताव 27 सितंबर 2014 में रखा गया था. इस प्रस्ताव पर गौर करने के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 11 दिसंबर 2014 में 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस या विश्व योगा दिवस के तौर पर घोषित किया. 2015 में पहला अंतरराष्ट्रीय योगा दिवस मनाया गया.
योग लोगों को ऊर्जावान रहने एवं कोविड-19 महामारी जैसे कठिन समय के दौरान एक सुदृढ़ प्रतिरक्षा प्रणाली बनाए रखने में सहायता कर रहा है।
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आज केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस (23 अप्रैल) मना रहा हैं साथ ही उन सभी लेखकों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करता हैं जिन्होनें अपनी लेखिनी के द्वारा समाज एवं देश को एक नई दिशा दी |
23 अप्रैल को वर्ल्ड बुक डे के रूप में मनाने की एक वजह ये भी है कि इस दिन कई प्रमुख लेखक या पैदा हुए थे या उनकी मृत्यु हो गई थी. विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का 23 अप्रैल को निधन हुआ था
किताबों के महत्व को बताने के लिए हर साल 23 अप्रैल को दुनियाभर में विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसका प्रमुख उद्देश्य किताबों को पढ़ना, उनका प्रकाशन तथा प्रकाशन से सम्बंधित अधिकारों को पूरी दुनिया में बढ़ावा देना है. आमतौर पर इसे लेखकों, चित्रकारों आदि को प्रोत्साहन देने के रूप में भी मनाया जाता है |
क्यों 23 अप्रैल को मनाया जाता है वर्ल्ड बुक डे-
23 अप्रैल को वर्ल्ड बुक डे के रूप में मनाने की एक वजह ये भी है कि इस दिन कई प्रमुख लेखक या पैदा हुए थे या उनकी मृत्यु हो गई थी. विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डे सर्वेंट्स और जोसेप प्लाया का 23 अप्रैल को निधन हुआ था जबकि मैनुएल मेजिया वल्लेजो और मौरिस ड्रून 23 अप्रैल के दिन पैदा हुए थे |
विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस की तैयारी में यूनेस्को ने लोगों को अपने आप को चुनौती देने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि वह अपने सामान्य से नए विषयों, स्वरूपों या शैलियों का पता लगा सकें. हमारा लक्ष्य लोगों को पढ़ने में संलग्न करना है. इस वर्ष के विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के उत्सव के रूप में यूनेस्को ने एक 'बुकफेस' चुनौती का निर्माण किया है |
विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के लिए 2024 की थीम -
हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक नई थीम चुनी जाती है. विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस के लिए 2024 की थीम ‘रीड योर वे’ है, जो पढ़ने के प्रति प्रेम को बढ़ावा देने और सभी उम्र के लोगों को उन पुस्तकों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने के महत्व पर प्रकाश डालती है जो उन्हें प्रेरित करती हैं.
दुनिया में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है वर्ल्ड बुक डे-
दुनिया के विभिन्न देशों में वर्ल्ड बुक डे को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. कहीं पर मुफ्त में पुस्तकें वितरित की जाती हैं तो कहीं प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है. स्पेन में दो दिनों तक रीडिंग मैराथन का आयोजन किया जाता है. इसके अंत में एक लेखक को मिगेल डे सरवांटिस पुरस्कार से नवाजा जाता है. इस दिन स्वीडन में स्कूलों में और कॉलेजो में लेखन प्रतियोगिता का आयोजन होता है |
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पुस्तके हमें देती ज्ञान का भंडार
पुस्तकों में सजा विश्व का आकार
पुस्तकें बताती भूत और भविष्य
पुस्तकों में जीवन का पूरा संसार।
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफ़ाइनरी नगर मथुरा
कई वर्षों तक फरवरी के आखिरी रविवार को IWD का आखिरी दिन मनाने के बाद, ऐसा ही एक रविवार 23 फरवरी, 1917 को पड़ा। इस दिन, रूसी महिलाओं ने चल रहे प्रथम विश्व युद्ध (1914 से 1918) और मौजूदा कमियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
विरोध का वह दिन जूलियन कैलेंडर के अनुसार 23 फरवरी था, तब रूस में प्रचलित ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार तारीख 8 मार्च थी जो कि कहीं अधिक व्यापक रूप से स्वीकृत थी। इस प्रकार यह दिन वैश्विक मानदंड बन गया ।
संयुक्त राष्ट्र ने आधिकारिक तौर पर 1975 में 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में नामित किया था।
महिलाओं में निवेश: प्रगति में तेजी लाएं ' 2024 में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का विषय है, जिसमें महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण से निपटने पर जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2024 के लिए अभियान का विषय 'इंस्पायर इंक्लूजन' है।
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा
आज दिनाँक 06/02/2024 को केंद्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा में वरिष्ठ अभिभावक दिवस का आयोजन बड़ी धूमधाम से किया गया। विद्यार्थियों एवं समाज को बुजुर्गों के सम्मान का महत्व बताने हेतु वरिष्ठ अभिभावक दिवस का आयोजन विद्यालय के प्राचार्य श्री संजय कुमार शर्मा जी के मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ अभिभावकों को रोली लगाकर पुष्पों से स्वागत किया गया। उसके उपरांत विद्यार्थियों द्वारा कई रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। इस दौरान वरिष्ठ अभिभावकों के लिए कई तरह के खेल आयोजित किए गए। कार्यक्रम का संचालन प्राथमिक शिक्षिका श्रीमती मनीषा मुद्गगल के द्वारा किया गया अंत में प्राथमिक शिक्षिका श्रीमती अनामिका दीक्षित ने उपस्थित लोगों के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर मथुरा
उनके हौंसले का मुकाबला ही नहीं है कोई
जिनकी कुर्बानी का कर्ज हम पर उधार है
आज हम इसीलिए खुशहाल हैं क्यूंकि
सीमा पे जवान बलिदान को तैयार है….
स्वतन्त्र भारत के नागरिकों के लिए 15 अगस्त और 26 जनवरी दोनों ही दिन बहुत विशेष हैं| इस दिन शहीदों की कुर्बानी को याद किया जाता है और वतन पर जान देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है| ये दिन देश भक्तों के नाम है जिन्होंने हँसते हुए फांसी का फंदा चूम लिया ताकि हम लोग आजाद हिंदुस्तान में सांस ले सकें|
उन शहीदों को दिल से सलाम जिन्होंने अपने घर, परिवार और अपने प्राणों की चिंता ना करते हुए अपना सब कुछ देश के लिए न्यौछावर कर दिया और भारत माता को अंग्रेजी बेड़ियों से मुक्त कराया| हम उन शहीदों को दिल से नमन करते हैं और सौगंध लेते हैं कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा, हम भी अपने प्राणों की चिंता किये बगैर इस मातृभूमि की रक्षा करेंगे |
जय हिन्द जय भारत जय संविधान।🇮🇳
पुस्तकालय केन्द्रीय विद्यालय रिफाइनरी नगर,मथुरा
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय,बस्ती में दिनाँक 07/02/2026 (शनिवार) को विदाई समारोह का आयोजन बड़े उत्साह और हर्षोल्लास के साथ किया गया। ...